कोर्ट ने बाबा रामदेव को फिर लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन केस में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ‘आचार्य’ बालकृष्ण और को-फाउंडर रामदेव बाबा को एक बार फिर फटकार लगाई है। इन्हे कोर्ट ने 19 मार्च को बुलाया था मगर दोनों ने कोर्ट का तिरस्कार किया जो बुलाने पर भी हाजिर नहीं हुए , अब फिर वह दोनों 2 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर हुए और बिना शर्त कोर्ट से माफ़ी मांगी परन्तु कोर्ट ने कहा कि अगर आपको माफ़ी मांगनी थी तो पहले मांग लेते । ऐसा लग रहा है कि कोर्ट पतंजलि के हलफनामे से संतुष्ट नहीं है । अब कोर्ट ने भारत सरकार के आयूष मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संपदा विभाग को भी नोटिस भेज चूका है । दोनों से हफ्ते के अंदर जवाब मांगा गया है, 10 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई की जाएगी।

इससे पहले 27 फरवरी को कोर्ट ने पतंजलि के स्वास्थ्य से जुड़े विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया था. कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी पूछा था कि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए. कोर्ट ने साफ कहा था कि पतंजलि अपने विज्ञापनों से पूरे देश को गुमराह कर रहा है. कोर्ट ने थायरॉइड, अस्थमा, ग्लूकोमा जैसी बीमारियों से ‘स्थायी राहत और इलाज’ का दावा करने वाले पतंजलि के विज्ञापनों को भ्रामक बताया था. अवमानना के नोटिस के बाद 19 मार्च को कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण दोनों को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने इससे पहले फरवरी सत्ताईस को स्वास्थ्य से जुड़े विज्ञापनों पर रोक लगाने को कहा था । कोर्ट ने केंद्र सर्कार के आगे भी प्रश्न रखा था कि कम्पनी के विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जाये। क्योंकि कोर्ट का कहना है कि पतंजलि के विज्ञापन पुरे देश को गुमराह कर रहे हैं।
कोर्ट का कहना है कि थायरॉइड, अस्थमा, ग्लूकोमा जैसी बीमारियों से ‘स्थायी राहत और इलाज’ का दावा करने वाले पतंजलि के विज्ञापनों पूरी तरह से भ्रामक हैं।

आखिरकार कोर्ट ने क्यों लगाई पतंजलि को फटकार ?

2 अप्रैल को जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच में जो सुनवाई हुई उस दौरान सुप्रीम कोर्ट को मालूम हुआ कि बाबा रामदेव का हलफनाम रिकॉर्ड पर मौजूद ही नहीं है, जो पतंजलि को रिप्रेजेंट कर रहे थे , सीनियर वकील बलबीर सिंह उनका कहना है कि उनके मुवक्किल आज खुद कोर्ट में आये हैं और वह माफी मांगना चाहते हैं।

2 अप्रैल को जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच के सामने सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को पता चला कि रामदेव का हलफनाम रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है. पतंजलि की तरफ से सीनियर वकील बलबीर सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल आज खुद कोर्ट में मौजूद हैं और खुद माफी मांगना चाहते हैं और बाबा रामदेव और बालकृष्ण हाजिर हैं जिन्होंने ने कोर्ट से .
हाथ जोड़कर माफी मांगी , और कहा कि उन्हें माफ किया जाये।

इस बात पर बेंच ने रामदेव को दन्त लगाते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश को गंभीरता से लेना चाहिए।
जिस तरह से उन्होंने माफ़ी मांगी बेंच इसे ‘लिप सर्विस’ कह रहा है और कहा कि उन्हें विस्तृत हलफनामा देना होगा। और कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार , पतंजलि के MD बालकृष्ण के हलफनामे में दिए गए ब्योरे से कोर्ट पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है जिसमे कहा गया था कि कंपनी के मीडिया विभाग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में किसी प्रकार की जानकारी नहीं थी।

इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि बालकृष्ण इस तरीके “अनजान बनने का बहाना” नहीं कर सकते हैं और आपके मीडिया विभाग को कोई “अलग द्वीप” नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस कोहली का पतंजलि से प्रश्न था कि जब एक बार कोर्ट को अंडरटेकिंग दी गई, तो ये किसकी ड्यूटी है कि वो मैसेज को सही जगह पहुंचाए ?

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इस पर पतंजलि की तरफ से एक और वकील विपिन सांघी राजी हुए और कहा कि गलती उनकी तरफ से हुई और जिसकी वह माफी भी मांग रहे हैं इस पर जस्टिस कोहली ने जवाब दिया,

“आपकी माफी इस कोर्ट के लिए काफी नहीं है, ये सुप्रीम कोर्ट को दी गई अंडरटेकिंग का खुला उल्लंघन है । जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है, सिर्फ ये कहना कि माफ करे दें, काफी नहीं है। हम भी कह सकते हैं हमें माफ कर दें, हम इस तरह की दलील को स्वीकार नहीं करेंगे। क्योंकि आपका मीडिया विभाग कोई अलग विभाग नहीं है , जिसे पता नहीं रहेगा कि कोर्ट की कार्यवाही में क्या हो रहा है। “

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