nitish CM

कैसे चलेगा बिहार में सियासी गणित

लोकसभा चुनाव 2024 का चुनावी बिगुल बजाया चुका है सभी पार्टियों और गठबंधनों ने अपनी तैयारी जा चुकी है। अब पूरा ध्यान बिहार पर केंद्रित है। अगर हम बात करें पिछले चुनावों के बारे में बात करें तो दो बार से भाजपा के नेतृत्व वाली NDA गठबंधन बिहार में कमाल कर रहा था , वहीं अगर इस बार की बात करें तो RJD और कांग्रेस के नेतृत्व वाले I.N.D.I.A गठबंधन को लेकर सियासी गलियारों में बहुत चर्चा चल रही है।

आपको बता दें कि राज्य में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक ऐसा गठबंधन बना है, जिसने सारे सियासी समीकरणों को का फेर बदल कर डाला है जी हाँ यहाँ पर बात हो रही है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के NDA से हाथ मिलाने की तो वही, नीतीश कुमार जो I.N.D.I.A गठबंधन के सबसे बड़े सहायक कहे जा रहे हैं। जिनके लीडरशिप में गठबंधन की पटना में पहली सबसे बड़ी बैठक सम्पन्न हुई थी।

उन्होंने चुनाव से कुछ समय पहले ही यानी जनवरी 2024 दोबारा से NDA के साठ हो गए थे। और I.N.D.I.A गठबंधन को को लाल झंडी दिखा दी थी। वैसे तो साल 2019 में भी नीतीश NDA के साथ लोकसभा चुनाव लड़े थे। परन्तु साल 2022 में उन्होंने NDA का साथ छोड़ RJD-कांग्रेस गठबंधन का हाथ थामा था।

Read More: Click Here

जब नीतीश कुमार द्वारा एक बार फिर से पाला बदला , फिर तो उनको लेकर बहुत सी बातें चर्चा में आने लगी। और कहा जाने लगा कि नीतीश पल्टूराम हैं वो कब पलटी खा जाएँ इसका उनको भी मालूम नहीं। ऐसे में सवाल उठता है कि कई बार धोखा खाने के बावजूद BJP ने नीतीश कुमार पर आखिरकार भरोसा क्यों करती है ? राजनीती में आप कोई भी निर्णय एकदम से नहीं ले सकते उसके फायदे और नुक्सान सब देख कर चलना चाहिए

सियासत को लेकर अक्सर माना जाता है कि यूं ही कोई फैसला नहीं लिया जाता है. हर समझौते के नफा-नुकसान होते हैं. अब नीतीश के I.N.D.I.A गठबंधन का साथ छोड़ने और NDA गठबंधन का दामन थामने के क्या फायदे-नुकसान हैं? चलिए आपको बता देते हैं कि अब तक बिहार का चुनावी पैटर्न कैसा रहा है।

अब आपको हम बता देते हैं कि बिहार की राजनीति को चंद शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता , तो आपको अच्छे से समझने के लिए हम इसको मोटा-मोटी छह क्षेत्रों में बांट लेते हैं जैसे मगध, भोजपुर, सीमांचल, कोसी , मिथिलांचल, और चंपारण। इन इलाकों में लगभग 38 जिले और लोकसभा की 40 सीटें हैं।

मगध


पटना साहिब,
नवादा,
जहानाबाद,
पाटिलपुत्र,
गया,
औरंगाबाद,
जमुई,
बांका,
मुंगेर और
नालंदा।

मिथिलांचल

दरभंगा
सीतामढ़ी,
शिवहर,
मुजफ्फरपुर,
वैशाली,
हाजीपुर,
मधुबनी,
झंझारपुर,
समस्तीपुर और
उजियारपुर।

सीमांचल

अररिया,
पूर्णिया,
कटिहार और
किशनगंज

सारण

महाराजगंज,
बक्सर,
आरा,
सासाराम,
काराकाट,
गोपालगंज,
सीवान, और
सारण

चंपारण

बाल्मीकि नगर,
पूर्वी चंपारण
और पश्चिमी चंपारण

कोसी

सुपौल,
मधेपुरा,
बेगूसराय,
खगड़िया और
भागलपुर सुपौल,
मधेपुरा,
बेगूसराय,
खगड़िया और भागलपुर।

क्या है जातिगत पॉलिटिक्स

अब बिहार में चुनाव होने हैं और जातियों का जिक्र न हो ऐसा नहीं हो सकता इसलिए सबसे पहले हम जातियों का पूरा समीकरण समझ लेते है। बीते साल राज्य में जातिगत सर्वे के कुछ आंकड़े जारी किये गए हैं । उसकी जानकारी आपको दे दें कि पिछड़े वर्ग का आंकड़ा 3 करोड़ 54 लाख 63 हजार थी। जबकि अगर हम बात करें अत्यंत पिछड़े वर्ग की तो उसकी आवादी 4 करोड़ 70 लाख 80 हजार थी।

और बात करें धर्म के आधार की तो हिंदुओं की आबादी है 10 करोड़ 71 लाख 92 हजार यानी की आप लगा लो कि 81.99 परसेंट. मुस्लिमों की आबादी है 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार, जो कि 17.70 फीसद और इसमें से चार से साढ़े चार फीसदी आबादी अगड़े मुस्लिमों की है और बौद्ध एक लाख 11 हजार यानी 0.08 परसेंट और ईसाई धर्म की आबादी है 75 हजार यानी 0.05 फीसदी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *