हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का असर

कैसा रहेगा चुनावो पर हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का असर

साल 2000 तारीख पंद्रह नवंबर को जब बिहार का वँटवारा हुआ था , एक नए राज्य का जन्म हो गया। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। अब इस बात को लगभग को बीते हुए 24 साल हो गएहैं और अब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है। अब देश में लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। झारखंड की राजनीती का तरीका ज़रा हट के है। यह इकलौता ऐसा राज्य है , जहां पर अलग – अलग दलों का इफ़ेक्ट है और यहाँ के मुद्दे एरिया के हिसाब से बदलते रहते हैं।

झारखण्ड का आधार

यहाँ पर हर सौ किलोमीटर की दूरी पर भाषा बदल जाती है। मसलन , वेस्ट बंगाल से लगे झारखण्ड के इलाको में बंगाली बोली का मिश्रण है। इसी प्रकार से ओडिसा के साथ लगने वाली भाषाओ का भी अलग मिजाज दिखता है तो बिहार से लगे हुए इलाकों में भी बिहार का चालचलन प्रचलित हो रहा है। आप आदिवासियों में भी भिन्न -भिन्न संस्कृति देखने को मिलती है इसी बजह से सभी चुनावी मुद्दे अलग – अलग है। इस सूबे में लोकसभा की कुल मिला कर 14 सीटें है :

अनुसूचित जनजाति – 5
अनुसूचित जाति – 1

राज्य के प्रशासनिक डिवीजन के अनुसार , झारखंड पांच हिस्सों में बंटा हुआ है :
कोल्हान
संथाल परगना
दक्षिणी छोटानागपुर
उत्तरी छोटानागपुर
पलामू

झारखंड के जातीय और धार्मिक समीकरण के हिसाब से :
OBC – 46 %
आदिवासी – 11 %
दलित – 26.2 %
मुस्लिम – 14 %

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